🧾 Income Tax पूरी गाइड in Hindi – FY 2026-27
1. टैक्स क्या है और कौन भरता है
आयकर वो कर है जो सरकार व्यक्तियों की आय पर लगाती है – सड़क, स्कूल, अस्पताल, सुरक्षा सब इसी से चलता है। भारत में जिसकी सालाना आय बुनियादी छूट सीमा से ऊपर जाती है, उसे हर साल (जुलाई–सितंबर में) ITR (Income Tax Return) भरना होता है। सैलरी वालों से तो बैंक आराम से TDS के रूप में कटता रहता है – ITR में उसी का हिसाब-किताब होता है।
एक शब्द समझ लीजिए – वित्तीय वर्ष (FY) अप्रैल से मार्च तक का साल है, और उसके बाद वाला साल निरीक्षण वर्ष (AY) कहलाता है जिसमें उसका ITR भरते हैं। आज चल रहा FY 2026-27 है (अप्रैल 2026 – मार्च 2027), जिसका ITR 2027 में भरेगा।
2. नई बनाम पुरानी रजिम – सबसे बड़ा फैसला
2019 से दो रास्ते खुले हैं:
| नई रजिम (default) | पुरानी रजिम | |
|---|---|---|
| दरें | कम (0–30%) | ज़्यादा (0–30%, पर ऊंची सीमाओं पर) |
| छूटें | लगभग नहीं (सिर्फ standard deduction आदि) | 80C, 80D, HRA, home loan ब्याज… |
| किसके लिए बेहतर | ज़्यादातर लोगों के लिए | जिनकी छूटें ढेर सारी हैं |
मोटा नियम: अगर 80C + 80D + HRA + home loan ब्याज मिलाकर आपकी छूटें ₹4 लाख से ज़्यादा नहीं बनतीं, तो नई रजिम में रहना आमतौर पर सस्ता पड़ता है। अपने आंकड़ों से तुलना हमारे Income Tax कैलकुलेटर से करें।
3. FY 2026-27 की slabs (नई रजिम)
| कर योग्य आय | दर |
|---|---|
| ₹0 – ₹4 लाख | शून्य |
| ₹4 – ₹8 लाख | 5% |
| ₹8 – ₹12 लाख | 10% |
| ₹12 – ₹16 लाख | 15% |
| ₹16 – ₹20 लाख | 20% |
| ₹20 – ₹24 लाख | 25% |
| ₹24 लाख+ | 30% |
पुरानी रजिम की slabs ज़्यादा सीधी हैं – 2.5 लाख तक शून्य, 2.5–5 लाख 5%, 5–10 लाख 20%, 10 लाख+ 30% (senior citizens को शुरुआती सीमा ज़्यादा)। साथ में मिलती हैं वो छूटें जिनकी बात आगे है।
4. ₹12.75 लाख तक टैक्स-फ्री का राज़
नई रजिम की सबसे सुनहरी बात, तीन हिस्सों में:
- Standard deduction ₹75,000: नौकरीपेशा/पेंशन पाने वालों की कुल सैलरी से बिना किसी बिल-प्रमाण के ₹75,000 कट जाता है (FY 2026-27 में औपचारिक रूप से लागू; पुरानी रजिम में ₹50,000)
- 87A रिबेट: कर योग्य आय ₹12 लाख तक हो तो बना हुआ कर रिबेट से पूरा माफ
- दोनों जोड़ें = ₹12.75 लाख तक की सैलरी पर शून्य कर
और ₹12 लाख से थोड़ी ऊपर वाली आय पर marginal relief – अतिरिक्त आय जितना ही कर लगे, उससे ज़्यादा नहीं। यह असली बात ज़्यादातर लोग नहीं जानते और कर वाले हिसाब से बिल्कुल बगल वाले सहकर्मी से बेहतर सैलरी लेकर भी घर ले जाने वाली रकम कम पा लेते हैं।
5. Cess और Surcharge – छुपे हुए जोड़
- हर कर पर 4% health & education cess ऊपर से लगता है
- आय ₹50 लाख से ऊपर होने पर surcharge – 10% (50L–1Cr), 15% (1–2Cr), 25% (2Cr+; नई रजिम में ऊपरी सीमा 25%)
- ₹50 लाख से नीचे की आय वालों को surcharge से कोई मतलब नहीं – सिर्फ 4% cess याद रखें
6. पुरानी रजिम की मशहूर छूटें
| छूट | क्या मिलता है | सीमा |
|---|---|---|
| 80C | PPF, ELSS, LIC, home loan principal, EPF… | ₹1.5 लाख |
| 80D | स्वयं/परिवार का health insurance | ₹25–75 हज़ार (उम्र पर) |
| HRA | किराए का बचाया हुआ हिस्सा | शहर/वेतन के हिसाब से |
| 24(b) | home loan का ब्याज (self-occupied) | ₹2 लाख |
| 80TTA/TTB | बचत खाते का ब्याज | ₹10 हज़ार / सीनियर ₹50 हज़ार |
याद रखें – ये सब सिर्फ पुरानी रजिम में। नई रजिम चुनने वाले अधिकांश लोगों के लिए ये लुप्त हो जाती हैं, इसीलिए पहले दोनों का हिसाब लगाएं। (PPF का फायदा दोनों में अलग अर्थ है – नई रजिम में ब्याज फिर भी टैक्स-फ्री; देखें PPF कैलकुलेटर।)
टैक्स बचत के जायज़ तरीके (दोनों रजिम में समझें)
टैक्स बचत का मतलब छुपाना नहीं, सही निवेश चुनना है। कुछ रास्ते:
- नई रजिम में: employer का NPS योगदान (80CCD(2)) छूट बनी हुई है – सैलरी संरचना में शामिल करवाएं
- पुरानी रजिम में: 80C की पूरी ₹1.5 लाख सीमा भरें – PPF (टैक्स-फ्री 7.1%, कैलकुलेटर देखें), ELSS, EPF सब गिनती में
- health insurance (80D) – बचत भी, सुरक्षा भी
- महिलाओं/पुरुषों सबके लिए: दोनों रजिम का हिसाब कैलकुलेटर से लगाकर जो सस्ता हो वही चुनें
सीनियर सिटिज़न की अलग बातें
- FD के ब्याज पर TDS सीमा ₹1 लाख (सामान्य ₹50 हज़ार) – ऊपर देखें FD कैलकुलेटर
- ब्याज आय पर 80TTB में ₹50 हज़ार तक छूट (पुरानी रजिम)
- पुरानी रजिम में शुरुआती स्लैब सीमा ज़्यादा (60+ पर ₹3 लाख, 80+ पर ₹5 लाख तक शून्य)
- ITR भरने में दिक्कत हो तो मदद लें – गलती नोटिस की वजह बनती है
7. ITR भरने का तरीका (सरल कदम)
- दस्तावेज़ जुटाएं: Form 16 (नौकरी वालों को बैंक/कंपनी देती है), ब्याज प्रमाणपत्र, निवेश के प्रमाण, Aadhaar, PAN
- Form 26AS और AIS देखें: incometax.gov.in पर लॉगिन करके – यह सरकार के पास आपकी आय की पूरी कॉपी है; आपके दिखाए आंकड़े इससे मेल खाने चाहिए
- सही फॉर्म चुनें: सैलरी वालों के लिए आमतौर पर ITR-1
- ऑनलाइन भरें (e-filing) – 5-15 मिनट का काम, मुफ़्त
- सत्यापित करें: Aadhaar OTP से तुरंत, या bank account से
अगर TDS ज़्यादा कट गया और कर कम बना, तो refund सीधे बैंक खाते में आता है (खाता PAN से linked और validated होना चाहिए)। जल्दी भरने वालों की refund भी जल्दी आती है।
8. 6 आम गलतियाँ
- बिना तुलना के नई रजिम चुन लेना – छूटें ज़्यादा हों तो पुरानी बचा सकती है
- दो नौकरियों की आय छुपाना – दोनों का TDS AIS में आ जाता है, बेमेल से नोटिस
- FD का ब्याज दिखाना भूल जाना – bank डालता है AIS में; ₹50,000/₹1 लाख की सीमा सिर्फ TDS की है, टैक्स की नहीं
- आख़िरी हफ़्ते की भागदौड़ – गलतियों और जुर्मानों की सबसे बड़ी वजह
- नोटिस आने पर घबरा जाना – ज़्यादातर नोटिस छोटी बेमेल के होते हैं; ऑनलाइन जवाब दे दें
- आय बढ़ने पर TDS न बढ़वाना – मार्च में देर से कटौती से बचें, बैंक/कंपनी को शुरू में ही बता दें
9. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्र. मेरी सैलरी ₹10 लाख है, क्या टैक्स लगेगा?
नई रजिम में नहीं! ₹75,000 कटकर ₹9.25 लाख taxable – ₹12 लाख से कम – 87A रिबेट से कर शून्य (बशर्ते सैलरी/पेंशन हो आय)।
प्र. ITR भरना किसे ज़रूरी है?
मोटे तौर पर – बुनियादी सीमा से ऊपर की आय वालों, TDS कटा हो, या refund चाहिए हो। नौकरी/बिज़नेस के मिश्रण में कंसल्टेंट या portal की मदद लें।
प्र. देर से भरा तो?
ब्याज लगता है (आय पर ₹5,000 तक late fee, ब्याज अलग)। बेहतर है समय पर, चाहे तारीख़ निकल जाने पर ही सही – न भरना सबसे बुरा विकल्प है।
प्र. पुरानी रजिम कब बचत करती है?
आमतौर पर जब 80C+80D+HRA+home loan ब्याज की कुल छूट ₹3.5–4 लाख पार कर जाए (मोटा अंदाज़ा – अपने आंकड़ों से जांचें)।
सरकारी नियम, ब्याज दरें, फीस और तारीखें समय-समय पर बदलती रहती हैं। कोई भी फ़ैसला लेने से पहले नीचे दी गई आधिकारिक वेबसाइट पर ताज़ा जानकारी ज़रूर जांच लें: