FY 2026-27 की नई रजिम स्लैब दरें
| कर योग्य आय (सालाना) | दर |
|---|---|
| ₹0 – ₹4 लाख | शून्य (0%) |
| ₹4 – ₹8 लाख | 5% |
| ₹8 – ₹12 लाख | 10% |
| ₹12 – ₹16 लाख | 15% |
| ₹16 – ₹20 लाख | 20% |
| ₹20 – ₹24 लाख | 25% |
| ₹24 लाख से ऊपर | 30% |
₹12 लाख तक कर क्यों शून्य?
सेक्शन 87A के तहत रिबेट से नई रजिम में कर योग्य आय ₹12 लाख तक का कर शून्य हो जाता है (रिबेट अधिकतम ₹60,000 तक)। नौकरीपेशाओं को ₹75,000 मानक कटौती अलग से मिलती है – यानी ₹12.75 लाख तक की सैलरी पर भी कोई कर नहीं बनता। ₹12 लाख से थोड़ा ऊपर वाली आय पर marginal relief मिलता है – अतिरिक्त आय जितना ही कर लगे, उससे ज़्यादा नहीं। यह calculator यही सब हिसाब अपने आप करता है।
बाकी चीज़ें जो यह calculator जानता है
- 4% health & education cess कर पर लगता है – शामिल है
- Surcharge सिर्फ ₹50 लाख से ऊपर की आय पर लगता है (10%–25%) – यह calculator उसके बिना अंदाज़ा देता है और आगे चेताता है
- यह हिसाब approximation है – deductions (80C आदि पुरानी रजिम में), HRA, अन्य आय (capital gain आदि) इसमें शामिल नहीं
Income Tax Calculator कैसे इस्तेमाल करें?
- अपनी सालाना कुल आय (CTC नहीं, taxable income) डालें – जैसे 1200000।
- सैलरी वालों के लिए Standard Deduction ₹75,000 अपने आप घटता है (नई regime में) – calculator में इसका ध्यान रखें।
- Regime चुनें – नई या पुरानी। कंफ्यूज़ हैं तो दोनों में calculate करके तुलना करें।
- 80C, 80D, HRA जैसी कटौतियां (पुरानी regime में) भरें।
- Calculate दबाएं – slab-wise tax, 4% cess और मासिक TDS सब दिख जाएगा।
- नतीजे को old-vs-new-regime टूल से मिलाएं और हर साल regime दोबारा चुनें – बदली आय पर बेहतर विकल्प बदल सकता है।
FY 2026-27 नई Regime Slab (सैलरी वालों के लिए खास)
नई regime में ₹12 लाख तक की taxable आय पर 87A rebate से ZERO tax – और सैलरी वालों को ₹75,000 standard deduction मिलाकर ₹12.75 लाख तक zero tax! Slab इस प्रकार हैं:
| सालाना आय | Tax Rate |
|---|---|
| ₹0 – ₹4 लाख | 0% |
| ₹4 – ₹8 लाख | 5% |
| ₹8 – ₹12 लाख | 10% |
| ₹12 – ₹16 लाख | 15% |
| ₹16 – ₹20 लाख | 20% |
| ₹20 – ₹24 लाख | 25% |
| ₹24 लाख से ऊपर | 30% |
याद रखें – tax के ऊपर 4% Health & Education Cess हमेशा लगता है, और ₹50 लाख से ऊपर आय पर surcharge भी जुड़ता है।
Tax बचाने के 6 सही तरीके (कानूनी)
- Regime की तुलना हर साल करें – ज़्यादा 80C/HRA वालों को अक्सर पुरानी regime सस्ती पड़ती है।
- NPS में ₹50,000 extra – 80CCD(1B) से नई regime में भी छूट मिलती है।
- 80D health insurance – खुद + माता-पिता के premium पर ₹25,000–₹50,000 तक कटौती (पुरानी regime)।
- HRA छूट सही से लें – metro में basic का 50%, non-metro में 40% वाला नियम; rent receipts संभालकर रखें।
- ELSS/LTCG का ध्यान – Equity LTCG सालाना ₹1.25 लाख तक tax-free, उसके ऊपर 12.5%।
- Form 16 और AIS मिलाएं – ITR भरने से पहले AIS/TIS में ब्याज-शेयर की entry ज़रूर check करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
नई और पुरानी regime में कौन सी बेहतर है?
कोई एक जवाब नहीं – ज़्यादा deductions (80C, HRA, home loan interest) वालों को अक्सर पुरानी, और बिना deduction वालों को नई regime सस्ती पड़ती है। हमारा old-vs-new-regime calculator दोनों की slab-by-slab तुलना करके बता देता है।
₹12.75 लाख तक zero tax का मतलब क्या है?
सैलरी वालों को ₹75,000 standard deduction मिलता है। ₹12.75 लाख सैलरी पर taxable आय ₹12 लाख बनती है, जिस पर 87A rebate से tax zero हो जाता है। ये सिर्फ नई regime में लागू है।
TDS और Income Tax में क्या अंतर है?
TDS सरकार का advance collection है – employer/bank आपकी आय से काटकर जमा करता है। असली tax liability ITR में तय होती है; ज़्यादा कटा TDS refund बनकर वापस मिलता है।
क्या FD के ब्याज पर भी tax लगता है?
हां, FD/RD ब्याज आपकी slab rate से taxable है। एक bank में सालाना ₹50,000 (वरिष्ठ नागरिक ₹1,00,000) से ज़्यादा ब्याज पर 10% TDS भी कटता है – TDS कटा हो तब भी ITR में पूरा ब्याज दिखाना ज़रूरी है।
ITR भरने की आखिरी तारीख क्या है?
सैलरी वालों (audit न हो तो) के लिए आमतौर पर 31 जुलाई। देर पर belated ITR पर ₹5,000 तक जुर्माना + ब्याज लगता है। तारीखें बदल सकती हैं, इसलिए income-tax-guide वाला blog भी देखें।
Advance Tax + TDS Credit (अक्सर छूट जाता है!)
Salary के अलावा FD ब्याज, rent, freelance income है? सालाना tax ₹10,000+ बने तो Advance Tax किस्तों में देना ज़रूरी है – नहीं तो 234B/234C ब्याज (1%/माह) लगता है! किस्तें: 15 Jun (15%), 15 Sep (45%), 15 Dec (75%), 15 Mar (100%)।
| किस्त तारीख | कुल tax का % |
|---|---|
| 15 June | 15% |
| 15 September | 45% |
| 15 December | 75% |
| 15 March | 100% |
सरकारी नियम, ब्याज दरें, फीस और तारीखें समय-समय पर बदलती रहती हैं। कोई भी फ़ैसला लेने से पहले नीचे दी गई आधिकारिक वेबसाइट पर ताज़ा जानकारी ज़रूर जांच लें: