🌾 PM Fasal Bima Yojana – पूरी गाइड: प्रीमियम, आवेदन, क्लेम
अंतिम अपडेट: 1 सितंबर 2026 · पढ़ने का समय: ~10 मिनट
भारत में खेती का सबसे बड़ा जोखिम जलवायु परिवर्तन के साथ यह जोखिम और बढ़ गया है – बेमौसम बारिश, अचानक ओलावृष्टि और चक्रवात अब हर साल किसी न किसी इलाके को प्रभावित करते हैं। ऐसे में फसल बीमा किसान के लिए खर्च नहीं, एक जरूरी सुरक्षा कवच है। मौसम है – सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि या कीटों का प्रकोप किसी भी साल किसान की पूरी मेहनत बर्बाद कर सकता है। इसी जोखिम से किसानों को बचाने के लिए सरकार चलाती है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)। इस गाइड में हम 2026 की ताजा जानकारी के साथ जानेंगे कि योजना कैसे काम करती है, किसान को कितना प्रीमियम देना होता है, आवेदन कैसे करें और फसल खराब होने पर क्लेम कैसे मिलता है।
1. PM Fasal Bima Yojana क्या है?
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) केंद्र सरकार की एक फसल बीमा योजना है जो 2016 के खरीफ सीजन से चल रही है। इसका मकसद किसानों को प्राकृतिक आपदाओं, कीटों और बीमारियों से हुए फसल नुकसान पर वित्तीय सुरक्षा देना है। इस योजना में किसान को बहुत कम प्रीमियम देना होता है, बाकी प्रीमियम सरकार (केंद्र + राज्य) मिलकर भरती है।
योजना की सबसे बड़ी खासियत: योजना के तहत फसल की बीमित राशि (sum insured) आमतौर पर उस फसल की उपज लागत – यानी एक हेक्टेयर में फसल उगाने में आने वाला खर्च – के बराबर तय होती है, जिसे स्केल ऑफ फाइनेंस कहते हैं। लोन लेने वाले किसान के लिए बीमित राशि उसके लोन के बराबर या उससे ज्यादा रखी जाती है, ताकि फसल खराब होने पर भी किसान का कर्ज डूबने न पाए। किसान का पूरा दावा सीधे उसके बैंक खाते में जाता है। कोई बिचौलिया नहीं। किसान का नामांकन (enrolment) हर सीजन से पहले होता है, और नुकसान होने पर सर्वे के बाद क्लेम राशि डीबीटी (DBT) से दी जाती है।
2. 2026 में किसान को कितना प्रीमियम देना है?
PMFBY में किसान को बीमा राशि (sum insured) का एक तय प्रतिशत ही प्रीमियम देना होता है, बाकी प्रीमियम सरकारें वहन करती हैं। 2026 के लिए लागू दरें:
| फसल का प्रकार | किसान का प्रीमियम (बीमा राशि का %) |
|---|---|
| खरीफ फसलें (धान, मक्का, दालें आदि) | 2% |
| रबी फसलें (गेहूं, सरसों, चना आदि) | 1.5% |
| वाणिज्यिक और बागवानी फसलें | 5% |
उदाहरण: अगर किसी फसल की बीमा राशि ₹50,000 प्रति हेक्टेयर है, तो खरीफ में किसान को सिर्फ ₹1,000 (2%) प्रीमियम देना होगा – बाकी का पूरा बोझ सरकार उठाती है। बीमा राशि आमतौर पर फसल की उपज की लागत (scale of finance) के बराबर तय होती है।
3. नामांकन (आवेदन) की तारीखें
हर सीजन की शुरुआत में नामांकन खुलता है और बंद होने की तारीख राज्य सरकारें तय करती हैं। सामान्य नियम:
- खरीफ सीजन: नामांकन अप्रैल-मई में शुरू होकर आमतौर पर 31 जुलाई तक चलता है।
- रबी सीजन: नामांकन अक्टूबर-नवंबर में शुरू होकर आमतौर पर 31 दिसंबर तक चलता है।
सटीक तारीखों के लिए अपने राज्य की कृषि विभाग की वेबसाइट या pmfby.gov.in पोर्टल देखें। देर से नामांकन करने पर किसान को योजना का लाभ उसी सीजन में नहीं मिल पाता – इसलिए बुवाई से पहले ही नामांकन करा लें।
4. नामांकन कैसे करें?
नामांकन के तरीके:
- बैंक शाखा: लोन लेने वाले किसानों का नामांकन बैंक खुद करती है।
- ऑनलाइन पोर्टल: pmfby.gov.in पर जाकर “किसान नामांकन” (Farmer Corner → Enrolment) से खुद भी नामांकन कर सकते हैं।
- CSC केंद्र: नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर से नामांकन कराया जा सकता है।
- कृषि विभाग / बीमा कंपनी के एजेंट: राज्य के कृषि कार्यालय या बीमा कंपनी के अधिकारी भी नामांकन में मदद करते हैं।
- किसान मित्र ऐप: कई राज्यों में किसान मित्र मोबाइल ऐप से भी नामांकन और फसल की जानकारी दर्ज की जा सकती है – इसमें फसल की फोटो और GPS लोकेशन के साथ जानकारी भेजी जाती है।
नामांकन के लिए आधार, बैंक खाता, फसल की जानकारी (फसल, रकबा, भूमि का खसरा/किसान क्रेडिट कार्ड) जरूरी है। बुवाई के बाद फसल की जानकारी की पुष्टि भी होती है, जो आमतौर पर मोबाइल ऐप या सर्वे के जरिए होती है।
5. किन नुकसानों पर मिलता है क्लेम?
PMFBY में कई तरह के नुकसान कवर होते हैं:
- बुवाई से पहले का नुकसान: बुवाई न हो पाने या बीज न उगने की स्थिति में (खड़ी फसल का बीमा कराने वाले किसानों के लिए)।
- मौसमी विपत्ति (Mid-Season Adversity): सूखा, बाढ़, अत्यधिक बारिश, भूस्खलन, ओलावृष्टि, कीट प्रकोप जैसी स्थितियों में।
- कटाई के बाद का नुकसान: फसल कटने के बाद खलिहान में सूखती/जमा फसल को ओला, चक्रवात, बारिश से नुकसान।
- स्थानीय आपदा (Localized Calamity): किसी गांव/क्षेत्र में हुई ओलावृष्टि, भूस्खलन, बाढ़ से अलग-अलग खेतों का नुकसान।
- जंगली जानवरों का हमला (नया – खरीफ 2026 से): अब जंगली जानवरों से फसल को हुए नुकसान पर भी क्लेम मिल सकता है।
- धान का जलमग्न रहना (नया – खरीफ 2026 से): धान के खेत में लगातार पानी भरा रहने से हुए नुकसान को भी अब कवरेज में शामिल किया गया है।
6. फसल खराब होने पर क्लेम कैसे करें?
अगर फसल को नुकसान हुआ है तो जल्दी करें:
- 72 घंटे के अंदर सूचना दें: नुकसान होने के 72 घंटों के भीतर पोर्टल (pmfby.gov.in), मोबाइल ऐप या टोल-फ्री हेल्पलाइन 14447 पर सूचित करें।
- फोटो/जानकारी जमा करें: ऐप या किसान मित्र के जरिए खेत की फोटो और जानकारी भेजें।
- सर्वे होगा: बीमा कंपनी के सर्वेयर खेत का मुआयना कर नुकसान का आकलन करेंगे।
- क्लेम राशि बैंक खाते में: मंजूरी के बाद राशि सीधे आपके बैंक खाते में जाती है।
क्लेम की स्थिति पोर्टल पर “Claim Status” से ट्रैक की जा सकती है। सर्वे के दौरान अगर आपको लगता है कि नुकसान का आकलन कम हुआ है, तो आप राज्य के कृषि विभाग या बीमा कंपनी के जिला कार्यालय में लिखित शिकायत कर सकते हैं और पुनः सर्वे की मांग कर सकते हैं। अगर क्लेम में देरी हो या समस्या आए, तो राज्य स्तरीय समिति (SLCCCI) और जिला स्तरीय समिति (DLCCCI) से शिकायत कर सकते हैं।
7. क्या-क्या दस्तावेज़ चाहिए?
- आधार कार्ड (नामांकन और क्लेम दोनों के लिए जरूरी)
- बैंक खाता विवरण (खाता संख्या, IFSC – आधार से लिंक)
- भूमि/खसरा की कॉपी या किसान क्रेडिट कार्ड
- फसल की जानकारी – फसल का नाम, रकबा, बुवाई की तारीख
- नुकसान होने पर – खेत की फोटो, लॉस इंटीमेशन की रसीद
8. PMFBY बनाम अन्य योजनाएं
किसानों के लिए कुछ और सहायता योजनाएं भी हैं, जिन्हें PMFBY के साथ भ्रमित न करें:
| योजना | क्या देती है? |
|---|---|
| PMFBY (फसल बीमा) | फसल नुकसान पर बीमा क्लेम |
| PM-Kisan (₹6,000/साल) | हर पात्र किसान परिवार को सीधे ₹6,000 सालाना |
| Kisan Credit Card | खेती के लिए कम ब्याज पर ऋण सुविधा |
| PM Kisan Maandhan | 60 साल के बाद ₹3,000/माह पेंशन |
इनके बारे में विस्तार से पढ़ें: PM-Kisan योजना गाइड और Kisan Credit Card गाइड।
9. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल: क्या बिना लोन वाला किसान भी PMFBY ले सकता है?
हाँ, बिना लोन वाले किसान भी स्वेच्छा से नामांकन करा सकते हैं और योजना का लाभ ले सकते हैं।
सवाल: प्रीमियम की अदायगी कैसे होती है?
लोन वाले किसानों के खाते से प्रीमियम कटता है; बिना लोन वाले किसान नामांकन के समय प्रीमियम जमा करते हैं। सरकार का हिस्सा सरकार खुद बीमा कंपनी को देती है।
सवाल: क्लेम पाने में कितना समय लगता है?
नुकसान के सर्वे के बाद क्लेम राशि सीजन के बाद तय समय-सीमा में दी जाती है; आमतौर पर मंजूरी के बाद कुछ हफ्तों में खाते में पहुंच जाती है।
सवाल: क्या बागवानी फसलों पर भी बीमा मिलता है?
हाँ, वाणिज्यिक और बागवानी फसलों पर 5% प्रीमियम पर बीमा मिलता है।
सवाल: हेल्पलाइन नंबर क्या है?
PMFBY की टोल-फ्री हेल्पलाइन 14447 है, और पोर्टल pmfby.gov.in है।
सवाल: क्या सभी फसलों पर बीमा मिलता है?
हाँ – अनाज, दलहन, तिलहन, कपास/गन्ना जैसी नकदी फसलें और बागवानी/वाणिज्यिक फसलें शामिल हैं; हर राज्य अपनी प्रमुख फसलों की सूची तय करता है।
सवाल: लोन लेने वाले किसान का नामांकन न हो तो क्या होगा?
लोन वाले (loanee) किसानों के लिए यह बीमा अनिवार्य है – बैंक प्रीमियम काटकर नामांकन करती है। अगर नामांकन नहीं हुआ तो क्लेम नहीं मिलेगा, इसलिए बैंक से नामांकन की पावती जरूर लें।
सवाल: क्लेम में देरी हो रही है, क्या करूं?
पहले पोर्टल पर क्लेम स्टेटस देखें; फिर जिला स्तरीय समिति (DLCCCI) या राज्य स्तरीय समिति (SLCCCI) में शिकायत करें; आखिरी में 14447 हेल्पलाइन से मदद लें।
10. क्लेम की राशि कैसे तय होती है?
क्लेम की राशि यानी बीमित राशि (sum insured) का वही हिस्सा मिलता है, जितना असल में नुकसान हुआ हो। इसके लिए बीमा कंपनी हर इलाके की फसल की सामान्य उपज (threshold yield) तय करती है – यानी पिछले कुछ सालों में उस इलाके की औसत पैदावार। जब सर्वे में पता चलता है कि इस साल की पैदावार उस सामान्य उपज से कम है, तो जितनी कमी है, उसी अनुपात में बीमित राशि का क्लेम मिलता है।
सरल उदाहरण: मान लीजिए किसी गांव में धान की सामान्य उपज 20 क्विंटल प्रति एकड़ तय है और आपकी बीमित राशि ₹50,000 प्रति एकड़ है। अगर इस साल बाढ़ से सिर्फ 12 क्विंटल ही पैदा हुई – यानी 40% की कमी – तो बीमित राशि का 40% यानी ₹20,000 प्रति एकड़ का क्लेम मिलेगा। फसल पूरी तरह नष्ट होने (100% नुकसान) पर पूरी बीमित राशि मिलती है।
क्लेम सीधे बैंक खाते में डीबीटी से जाता है। याद रखें: जिन्होंने सीजन में समय पर नामांकन कराया था, उन्हें ही क्लेम मिलता है – इसलिए नामांकन की तारीखें कभी न चूकें।
11. योजना कैसे लागू होती है और पैसा कहां से आता है?
PMFBY में किसान का प्रीमियम सिर्फ एक छोटा हिस्सा है – बाकी प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर भरती हैं। यानी:
- किसान अपना प्रीमियम (2% / 1.5% / 5%) देता है
- बाकी प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकार के बीच तय अनुपात में साझा होता है
- बीमा कंपनियां सरकार द्वारा चुनी जाती हैं और नामांकन, सर्वे व क्लेम की पूरी प्रक्रिया चलाती हैं
- क्लेम की राशि बीमा कंपनी से सीधे किसान के बैंक खाते में जाती है
पूरा रिकॉर्ड डिजिटल है – नामांकन, फसल कटाई प्रयोग (CCE), सर्वे और क्लेम भुगतान सब पोर्टल (pmfby.gov.in) पर दिखता है। इससे पारदर्शिता रहती है और बिचौलियों की गुंजाइश नहीं बचती। अगर क्लेम में अनुचित देरी हो तो राज्य स्तरीय फसल बीमा समिति में शिकायत की जा सकती है।
12. किसानों के लिए 5 जरूरी सुझाव
- हर सीजन समय पर नामांकन कराएं – खरीफ के लिए लगभग 31 जुलाई और रबी के लिए लगभग 31 दिसंबर से पहले।
- नामांकन की पावती/रसीद जरूर रखें – यही आपके बीमित होने का सबूत है।
- नुकसान होते ही 72 घंटे में सूचना दें – 14447 हेल्पलाइन या पोर्टल पर; देर करने पर क्लेम खतरे में पड़ सकता है।
- खेत की फोटो खींचकर रखें – नुकसान के समय की फोटो सर्वे और क्लेम में काम आती है।
- बैंक खाता आधार से लिंक रखें – क्लेम सीधे खाते में आता है; पुराना/गलत खाता होने पर भुगतान रुक सकता है।
13. सारांश: किसान के लिए जरूरी बातें
- खरीफ में 2%, रबी में 1.5%, बागवानी/वाणिज्यिक में 5% प्रीमियम – बाकी सरकार भरती है।
- नामांकन हर सीजन से पहले – खरीफ के लिए लगभग 31 जुलाई, रबी के लिए लगभग 31 दिसंबर तक।
- नुकसान होते ही 72 घंटे में सूचना दें (14447 / pmfby.gov.in)।
- खरीफ 2026 से जंगली जानवरों का हमला और धान का जलमग्न रहना भी कवर है।
- क्लेम सीधे बैंक खाते में – कोई बिचौलिया नहीं।
खेती से जुड़ी अन्य मदद के लिए देखें: PM-Kisan गाइड, KCC गाइड और खेत का क्षेत्रफल कैलकुलेटर (tools में)।
सरकारी नियम, ब्याज दरें, फीस और तारीखें समय-समय पर बदलती रहती हैं। कोई भी फ़ैसला लेने से पहले नीचे दी गई आधिकारिक वेबसाइट पर ताज़ा जानकारी ज़रूर जांच लें: