यह टूल क्या है और क्या काम करता है? (A2Z)
भारत में टैक्स भरने के दो तरीके (रेजीम) हैं: नई रेजीम – कम दरें, पर deductions नहीं; और पुरानी रेजीम – ज़्यादा दरें, पर 80C, HRA, home loan जैसी छूटों से taxable आय घटती है। हर साल यह उलझन खड़ी होती है – "मेरे लिए कौन सी सस्ती पड़ेगी?" यह calculator बिल्कुल वही हिसाब करता है जो आपका CA करता है: दोनों रेजीम में आपका पूरा टैक्स अलग-अलग निकालकर side-by-side रखता है और बताता है किसमें कितना बचत होगी।
यह कैसे गणना करता है – पूरी लॉजिक, स्टेप-दर-स्टेप
Calculator दोनों रेजीम के लिए एक जैसे 6 स्टेप चलाता है (सिर्फ नियम अलग-अलग हैं):
- Taxable आय बनाना: नई रेजीम में gross से सिर्फ standard deduction ₹75,000 घटता है (deductions नहीं मिलते)। पुरानी रेजीम में ₹50,000 standard deduction + आपके सारे deductions (80C, 80D, NPS, HRA, home loan ब्याज, अन्य) घटते हैं।
- Slab-दर-सlab टैक्स: नीचे दी दोनों slab टेबल के हिसाब से हर हिस्से पर उसकी दर लगती है (जैसे: पहले ₹4 लाख पर 0%, अगले ₹4 लाख पर 5%...)।
- 87A rebate: नई रेजीम में taxable आय ₹12 लाख तक हो तो ₹60,000 तक का टैक्स माफ (इसीलिए ₹12.75 लाख salary तक salaried का टैक्स zero)। पुरानी रेजीम में ₹5 लाख तक आय पर ₹12,500 तक माफ।
- Surcharge: taxable आय ₹50 लाख+ पर 10%, ₹1 करोड़+ पर 15%, ₹2 करोड़+ पर 25% – और पुरानी रेजीम में ₹5 करोड़+ पर 37% (नई रेजीम में ज़्यादा-से-ज़्यादा 25% ही)।
- 4% Health & Education Cess: (टैक्स + surcharge) पर।
- तुलना: दोनों फाइनल टैक्स को जोड़कर बताता है – कौन जीता और कितने ₹ का फर्क।
दोनों रेजीम की slab दरें (FY 2026-27)
| आय का हिस्सा | नई रेजीम | पुरानी रेजीम (60- साल) |
|---|---|---|
| पहली ₹2.5 लाख | 0% (₹4 लाख तक 0%) | 0% |
| ₹2.5-5 लाख | — (0% में शामिल) | 5% |
| ₹4-8 लाख | 5% | — |
| ₹5-10 लाख | — | 20% |
| ₹8-12 लाख | 10% | — |
| ₹10 लाख+ | — | 30% |
| ₹12-16 लाख | 15% | — |
| ₹16-20 लाख | 20% | — |
| ₹20-24 लाख | 25% | — |
| ₹24 लाख+ | 30% | — |
पुरानी रेजीम में Senior (60+) को पहले ₹3 लाख तक और Super Senior (80+) को पहले ₹5 लाख तक छूट — नई रेजीम में उम्र का फर्क नहीं। Budget 2026 ने दरें नहीं बदलीं, इसलिए यही दरें FY 2026-27 पर लागू हैं।
असली उदाहरण – calculator ने यही निकाला
| Salary + deductions | नई रेजीम टैक्स | पुरानी रेजीम टैक्स | जीतने वाली |
|---|---|---|---|
| ₹8 लाख, deductions ₹1 लाख (80C 50k + 80D 50k) | ₹0 | ₹44,200 | नई – ₹44,200 बचत |
| ₹12 लाख, deductions ₹2 लाख (80C 1.5L + 80D 50k) | ₹0 | ₹1,06,600 | नई – ₹1,06,600 बचत |
| ₹15 लाख, deductions ₹4 लाख (80C+80D+home loan 2L) | ₹97,500 | ₹1,32,600 | नई – ₹35,100 बचत |
| ₹15 लाख, deductions ₹5.45 लाख+ | ₹97,500 | ₹97,200 से कम | पुरानी – हल्का फायदा शुरू |
| ₹20 लाख, deductions ₹2 लाख (80C 1.5L + 80D 50k) | ₹1,92,400 | ₹3,51,000 | नई – ₹1,58,600 बचत |
पैटर्न साफ है: जब तक deductions (HRA + 80C + home loan ब्याज मिलाकर) ढंग के नहीं होते, नई रेजीम आमतौर पर जीतती है। बड़ा HRA मिलता हो (metro में किराया), बड़ा home loan चल रहा हो, या 80C+80D+NPS सब भरते हों – तभी पुरानी रेजीम बच सकती है। अपना असली हिसाब ऊपर calculator से लगाएं।
कौन-सी छूटें कहां मिलती हैं – एक नज़र में
| छूट | नई रेजीम | पुरानी रेजीम |
|---|---|---|
| Standard deduction | ₹75,000 | ₹50,000 |
| 80C (PF, LIC, PPF, ELSS...) | ❌ | ✅ ₹1.5 लाख तक |
| 80D (मेडिकल इंश्योरेंस) | ❌ | ✅ ₹25,000 (seniors ₹50,000) |
| HRA | ❌ | ✅ |
| Home loan ब्याज 24(b) | ❌ | ✅ ₹2 लाख तक |
| 80CCD(1B) NPS | ❌ | ✅ ₹50,000 अतिरिक्त |
| 87A rebate | ₹60,000 (₹12 लाख आय तक) | ₹12,500 (₹5 लाख आय तक) |
| Surcharge की सीमा | ज़्यादा-से-ज़्यादा 25% | ₹5 करोड़+ पर 37% |
मैं अपना टैक्स और कैसे घटा सकता हूं?
- नई रेजीम में ही रहना है तो: employer के NPS (80CCD(2)) में पैसा डालें – यह नई रेजीम में भी घटता है (calculator में "अन्य" में जोड़कर अंदाज़ा लगाएं)।
- पुरानी रेजीम चुनेंगे तो: 80C पूरा भरें (₹1.5 लाख), 80D मेडिकल इंश्योरेंस, NPS के ₹50,000 अतिरिक्त, HRA का पूरा claim (किराया receipt रखें)।
- Salary structure देखें: कुछ भत्ते (LTA, food coupon) पुरानी रेजीम में अलग से छूट पाते हैं – HR से पूछें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
क्या यह calculator FY 2026-27 (अप्रैल 2026 - मार्च 2027) के लिए सही है?
हां – बजट 2026 (1 फरवरी 2026) ने दरें नहीं बदलीं, इसलिए FY 2026-27 में यही slabs, ₹75,000 standard deduction और ₹60,000 की 87A rebate लागू हैं।
नई रेजीम में ₹12.75 लाख तक टैक्स zero कैसे?
₹12.75 लाख salary − ₹75,000 standard deduction = ₹12 लाख taxable। इतनी आय पर बनने वाला टैक्स ₹60,000 से कम होता है, और 87A rebate पूरा माफ कर देता है।
HRA छूट calculator में कैसे डालूं?
HRA की असली छूट = कम से कम (मिला HRA; किराया − 10% salary; metro में 50%/अन्य 40% salary)। अपना जो असली exempt हिस्सा है वही डालें – पूरा HRA नहीं।
Surcharge में marginal relief का क्या?
₹50 लाख/₹1 करोड़ पार करते ही surcharge लगता है, पर कानून में marginal relief है (आय थोड़ा ज़्यादा होने पर टैक्स उतना ही ज़्यादा नहीं बनता)। यह calculator surcharge का मुख्य हिसाब दिखाता है; सीमा वाली आय पर सटीक रकम CA से मिलाएं।
मेरी salary में शेयर/FD का ब्याज भी है – डालूं?
हां, उसे gross आय में जोड़ दें – slab दरें वही लगती हैं। (शॉर्ट-टर्म/लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन के अलग दरें हैं – उनका यह calculator हिसाब नहीं दिखाता।)
हर साल रेजीम बदल सकते हैं?
Salaried हर साल बदल सकते हैं (salary income वालों के लिए)। बिज़नेस आय वालों के लिए पुरानी रेजीम छोड़ने के बाद लौटने पर पाबंदी है।
तुलना Calculator कैसे इस्तेमाल करें?
- अपनी gross सालाना आय भरें (सैलरी + ब्याज + अन्य आय)।
- 80C निवेश (PPF/ELSS/LIC – max ₹1.5 लाख) डालें।
- HRA छूट, 80D premium, home loan interest भरें – जो लागू हो।
- NPS extra ₹50,000 (80CCD-1B) अलग से डालें – ये नई regime में भी मिलता है।
- तुलना देखें – दोनों regimes का tax + अंतर साफ दिखेगा; कम tax वाली regime चुनें।
किसे कौन सी Regime? (आम नियम)
| आपकी स्थिति | अक्सर बेहतर |
|---|---|
| कोई deduction नहीं / कम निवेश | नई Regime |
| 80C पूरा + HRA + 80D | पुरानी Regime |
| Home loan interest ₹2 लाख | पुरानी Regime |
| सिर्फ NPS ₹50,000 extra | नई Regime |
| आय ₹12.75L तक (सैलरी) | नई Regime (zero tax) |
Regime चुनते समय ध्यान रखें
- नई regime default है – ITR में पुरानी चाहिए तो उसे चुनना पड़ता है।
- Business income वालों के लिए regime बदलने के नियम सख्त हैं (Form 10-IEA) – CA से पूछें।
- सैलरी वाले हर साल बदल सकते हैं – कोई रोक नहीं।
- Employer को दिया चुनाव final नहीं – TDS के लिए दिया विकल्प ITR में बदला जा सकता है।
- सिर्फ tax नहीं, सुविधा भी देखें – नई regime में कागज़-झंझट लगभग zero है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
क्या हर साल regime बदली जा सकती है?
सैलरी वालों के लिए हां – हर financial year में ITR भरते समय चुनाव किया जा सकता है। Business/professional income वालों पर कुछ शर्तें लागू होती हैं।
नई regime में कौन सी कटौतियां मिलती हैं?
Standard deduction (₹75,000 सैलरी), NPS extra ₹50,000 (80CCD-1B), Agniveer fund जैसी कुछ खास कटौतियां मिलती हैं। 80C, HRA, 80D, home loan interest नहीं मिलते।
80C पूरा करने पर कौन सी regime बेहतर?
आमतौर पर सिर्फ 80C (₹1.5L) से पुरानी regime नहीं जीतती – साथ में HRA या home loan interest भी चाहिए। Calculator में अपने आंकड़े डालकर पक्का करें।
Marginal relief क्या है?
₹12 लाख के ठीक ऊपर जाने पर tax आय से ज़्यादा न बढ़े, इसके लिए राहत मिलती है – ताकि ₹12.1 लाख वाले पर ₹12 लाख वाले से बहुत ज़्यादा tax न पड़े।
TDS regime और ITR regime अलग हो सकते हैं?
हां। Employer को TDS के लिए बताई regime ITR में बदली जा सकती है – final tax ITR वाली regime से ही तय होता है।
सरकारी नियम, ब्याज दरें, फीस और तारीखें समय-समय पर बदलती रहती हैं। कोई भी फ़ैसला लेने से पहले नीचे दी गई आधिकारिक वेबसाइट पर ताज़ा जानकारी ज़रूर जांच लें: